शुक्रवार, 5 दिसंबर 2008

तुम्हारी याद

तब याद तुम्हारी

जब शामो-सहर के आँगन में
हर साल बहारें आती हैं
जब काली घटा के दामन में
बगुलों की कतारें आती हैं
तब याद तुम्हारी आती है
बड़ी देर मुझे तड़पाती है।

जब पायल की झंकार बजे
जब होंठ पे कोई राग सजे
जब पंछी गीत सुनाते हैं
सरवर में कमल मुस्काते हैं
तब याद तुम्हारी आती है
बड़ी देर मुझे तड़पाती है।

जब तारे टिम-टिम करते हैं
परबत से झरने झरते हैं
जब नदिया कल-कल करती है
जब चाँदनी आहें भरती है
तब याद तुम्हारी आती है
बड़ी देर मुझे तड़पाती है।

जब आँख में सपने पलते हैं
अरमान मचलने लगते हैं
जब रात सँवरने लगती है
तन्हाई डरने लगती है
तब याद तुम्हारी आती है
बड़ी देर मुझे तड़पाती है।

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